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दूर दूर तक हो रही मांग अरब देशो के अंगूर की ,क्या ख़ास है इन अँगुरो में,भारत के अंगूर पिछड़े

सऊदी अरब के ऐतिहासिक शहर ताइफ़ के अंगूरों की शोहरत काफी दूर-दूर तक की है खाड़ी देशों में काफी मशहूर है

एक लाख से ज्यादा अंगूर के पेड़ का उत्पादन खाड़ी देशों में भेजा जा रहा है।

सबक वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक देश के अंदर ताइफ़ के स्वादिष्ट अँगुर की मांग काफी ज्यादा बढ़ चुकी है ताइफ़ आने वाले लोग तोहफे के तौर पर खासतौर से अंगूर खरीदते हैं।

ताइफ़ में अँगुर के बागों के मालिक ने अंगूर की मार्केटिंग का खास अभियान शुरू किया है।

ताइफ़ के नागरिकों का कहना है कि यहाँ बाग लगाने वाले और उनकी देखभाल बहुत ही उत्सुकता के साथ कर रहे हैं।

ताइफ़ के नागरिकों का कहना है कि पर्यावरण मंत्रालय और जल कृषि मंत्रालय के द्वारा भी सिलसिले में काफी ज्यादा सहयोग हासिल हो रहा है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे इलाके में शादी ब्याह के साथ विभिन्न तरह के समारोह की व्यवस्था की जाती है

तथा ताइफ़ के अँगुर दस्तरखान की शान बन जाते हैं।

ताइफ़ में अंगूरों के बागों का बड़े पैमाने पर सिलसिला करीब 7 दशकों पहले से बनू सआद के इलाके में है। इसके अलावा वादी मोहर्रम, पूर्व ताइफ़, के अल अर्ज़, बनी सालेम के गांव में अंगूर के बाग हर तरफ नजर आते हैं।

500 से ज्यादा बाग़ एक हज़ार टन से ज़्यादा अँगुर पैदा करते हैं।

यहां पर दो तरह के अंगूर पाए जाते हैं एक सफेद रंग का अंगूर होता है और दूसरा काला रंग का सफेद अँगुर ज्यादा लोकप्रिय है। इसके दाने काफ़ी बड़े होते हैं।

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